भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश सरकार के सभी स्तरों पर सूचना और नागरिकों को सेवाएं प्रदान करने वाला सीएम डैश बोर्ड लगभग 1 साल से अधिक समय से ठप है सितंबर 2024 के बाद से इस पोर्टल का सारा डेटा गायब है | लोगों को सरकार की योजनाओं , उनकी प्रगति व 33 विभागों की रिपोर्ट की जानकारी नहीं मिल पा रही है | जबकि यह पोर्टल सरकारी कामों में पारदर्शिता का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था जनता एक क्लिक पर जान सकती थी कि किस विभाग ने कितना काम किया ? किस योजना में कितने लाभार्थी बने ? कितना खर्चा हुआ ? इस तरह अफसरों की जवाबदेही तय करने का भी यह बड़ा माध्यम था |
प्रदेश में इस पोर्टल की शुरूआत वर्ष 2017 में की गई थी | उस वक्त दावा किया था कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म राज्य सरकार के 33 प्रमुख विभाग और उनकी लगभग 200 योजनाओं व परियोजनाओं का डेटा एक ही जगह उपलब्ध करवाएगा | ऐसा हुआ भी डैश बोर्ड पर मुख्यमंत्री से लेकर जिला कलेक्टर तक योजनाओं की प्रगति , मंजूर प्रोजेक्ट , बजट व्यय और लाभार्थियों की संख्या जैसी जानकारियां सही समय में अपडेट होती थीं | शुरुआत के कुछ साल तक पोर्टल व्यवस्थित चलता रहा , लेकिन उसके बाद ठप हो गया | जानकारी के मुताबिक पिछले साल सीएम डैश बोर्ड से अचानक सारा डेटा हटा दिया गया था | इसके पीछे तकनीकी कारण बताए गए थे , लेकिन इतने लंबे समय बाद भी पोर्टल फिर से चालू नहीं हुआ | इस दौरान न तो शासन ने इसकी सुध ली और न ही बताया गया कि यह सिस्टम कब तक बहाल होगा ? ई – गवर्नेंस का अर्थ है – सरकार की पारदर्शिता , जवाबदेही और दक्षता को बढ़ावा , लेकिन जो प्लेटफॉर्म इस व्यवस्था का चेहरा हो , वो महीनों तक निष्क्रिय रहे तो पूरे सिस्टम पर सवाल उठना जरूरी है
सीएम डैश बोर्ड के विभागों और जिला प्रशासन के विभागाध्यक्षों / अधिकारियों को चयनित योजनाओं / परियोजनाओं के प्रमुख निष्णादन संकेतकों ( केपीआई ) पर वास्तविक समय डेटा प्रस्तुत करने की सुविधा प्रदान कर्ता है |
यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ई गवर्नेंस को बढ़वा देने की बात बार – बार करते हैं मगर हकीकत कुछ और ही है डैश बोर्ड के माध्यम से पहले मुख्यमंत्री समेत मंत्री , वरिष्ठ अधिकारी योजनाओं की प्रगति को प्रतिदिन देखते थे | इसी डेटा के आधार पर मुख्यमंत्री स्तर पर बैठकें होती थीं | प्रत्येक विभाग कम काम , उसकी प्रगति और उपलब्धियां इसी पर अपलोड होती थीं | लोगों के लिए भी यह पोर्टल खुला था , जहां कोई भी व्यक्ति सरकारी योजनाओं की स्थिति देख सकता था | अगस्त में ही सीएम को केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग ( डीएआरपीजी ) की ओर से राष्ट्रीय ई गवर्नेंस पुरस्कार की स्वर्ण श्रेणी में सम्मान मिला था | उस वक्त प्रदेश की डिजिटल व्यवस्था की सराहना की गई थीं , लेकिन यही राज्य अब अपने पुराने ई – गवर्नेंस प्लेटफॉर्म को ठीक नहीं रख पा रहा |
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