भोपाल ( कशिश मालवीय ) स्वच्छता में शहर को प्रथम बनाने के लिए तत्कालीन महापौर आलोक शर्मा ने अक्टूबर 2019 में हर वार्ड दारोगा को एक ई – स्कूटर सौंपा था | मकसद यह था कि अधिकारी अपने क्षेत्र में स्वच्छता शिकायत पर निरीक्षण तत्काल कर सकें | लेकिन छह साल बाद नतीजा यह है कि 85 में से सिर्फ दो – चार स्कूटर ही किसी तरह चलने लायक बचे हैं , बाकी या तो जंग खा चुके हैं या गायब हैं |
यह ई – स्कूटर उस समय एक लगभग 50 हजार रुपए कीमत कि थी , करीब 42 लाख रुपए में खरीदे गए थे | मेंटेनेंस न होने और समय पर बैटरी न बदली जाने के कारण अब ये सभी ई – स्कूटर कबाड़ हो गए हैं | इन वाहनों की स्थिति देखी तो मामले की पड़ताल की गई पता चला कि इन वाहनों का नगर निगम की ओर से रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया , जिससे इनका रिकॉर्ड तक नहीं है |
नगर निगम ने बिना रजिस्ट्रेशन कराए सभी ई – स्कूटर वार्ड दारोगाओं को सौंप दिए थे | चौंकाने की बात यह कि जो कुछ वाहन अभी भी चल रहे हैं , उनका रजिस्ट्रेशन आज तक भी नहीं कराया गया | वर्तमान में ज़्यादातर ई – स्कूटर जोन कार्यालयों और निगम की वर्कशॉप में कबाड़ के ढेर में पड़े हैं | कुछ के केवल सिर्फ ढांचे बचे हैं , तो कई का कोई रिकॉर्ड तक नहीं है | निगम के पास गायब वाहनों की सूची या जवाबदेही तय करने का कोई दस्तावेज़ मौजूद नहीं है |
कई ई – स्कूटरों की मरम्मत या बैटरी बदलने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया | नतीजा पूरी योजना कुछ ही महीनों में ठप पड़ गई | नगर निगम ने जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए इन वाहनों का न तो रखरखाव किया न ज़िम्मेदारी तय की | छह साल बाद आज यह योजना लापरवाही की मिसाल बन गई है |
महापौर मालती राय ने कहा – हमें इस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है , जांच कराई जाएगी कि कितने ई स्कूटर वितरित किए गए थे और वे वर्तमान में कहां हैं |
नगर निगम आयुक्त संस्क्रति जैन ने कहा – जहां तक मुझे जानकारी है , यह मामला पुराना है | ई – स्कूटर सफाई दारोगा के लिए नहीं था | इसकी जांच कराई जाएगी कि ई – स्कूटर कहां गए है |
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