भोपाल ( कशिश मालवीय )मध्यप्रदेश राजधानी में गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( पीडीएस ) के तहत एक बड़ा मामला घोटाले का सामने आया है | गरीबों को मिलने वाले चावल की अवैध ब्रिकी सालों से दुकानों पर चल रही है , इस पर खाद्द एवं आपूर्ति विभाग की टीम महीनों से नजर रख रही थी | जांच में दो व्यापारियों राजकुमार ट्रेडर्स के राजकुमार आसवानी के यहां से 450 क्विंटल और महालक्ष्मी ग्रेन मार्ट के विनोट रिझवानी के गोदाम से कुल 52 क्विंटल पीडीएस का चावल बरामद किया गया | यह चावल अलग – अलग मिलों में प्रोसेस कर बाजार में महंगे दाम पर बेचने की तैयारी की जा रही थी | हैरानी वाली बात यह रही कि 15 लाख रुपए से अधिक कीमत का यह पूरा स्टॉक जब्त करने के बाद एडीएम अंकुर मेश्राम ने सिर्फ 30 हजार रुपए का मामूली जुर्माना लगाकर चावल वापस कर दिया | इस फैसले ने प्रशासनिक हलको से लेकर आम जनता तक , कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं |
जांच के बाद चावल के नमूने नागरिक आपूर्ति निगम की लैब में में भेजे गए थे , रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि यह वही चावल है , जिसे गरीब परिवारों को पीडीएस के तहत वितरण किया जाता है | व्यापारी न तो ऐसा चावल वैध रूप से खरीद सकता है और न ही बिना अनुमति इसके भंडारण का अधिकार रखता है यानी मामला पूरी तरह अवैध गतिविधि का था |
जांच में सामने आया कि चावल अवैध रूप से से खरीदा गया , बिना अनुमति के स्टोरेज किया गया | पूरा मामला अवैध रूप से गड़बड़ी की ओर संकेत कर रहा था , इसके बाद भी एडीएम कोर्ट से सिर्फ 30 हजार रुपए का जुर्माना और पूरा चावल वापस करने का आदेश जारी किया | यह फैसला गरीबों के राशन की काला बाजारी व भविष्य में होने वाली कार्रवाई दोनों को कमजोर कर सकता है |
एडीएम , अंकुर मेश्राम ने कहा – फूड विभाग के केस में कुछ खामियाँ थीं आरोपियों के वकीलों ने उन्हीं के आधार पर दलीलें दीं नियमानुसार जुर्माना लगाया गया वर्तमान में मेरे पास फूड विभाग का प्रभार नहीं है |
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