भोपाल ( कशिश मालवीय ) एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है जिस आईपीएस अफसर का निधन हो गया है वही मृत अफसर के साइन का सहारा लेकर 8 करोड़ रुपए हड़पे | बड़ी बात तो यह है कि इस खेल की चाल इतनी शातिर कि रिन्यूअल के नाम सरकारी खजाने में हेराफेरी होती रही लेकिन कानों – कान किसी को इसकी खबर तक नहीं लगी | आईपीएस अफसर की मौत दो साल पहले ही हो चुकी थी उनके हस्ताक्षर वाला पसारा लाइसेंस इस्तेमाल कर एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने संस्कृति विभाग से जुड़े 14 कार्यालयों के लिए कंटैक्ट हासिल कर लिया यही नहीं फर्जी लाइसेंस के आधार पर हासिल इस कंटैक्ट से 5 साल में 8 करोड़ से ज्यादा का पेमेंट भी ले लिया |
क्लासिक सिक्योरिटी सर्विस एंड कंसलटेंट के संचालक आरके पांडे को 12 मई 2012 को गृह विभाग से सिक्युरिटी लाइसेंस क्रमांक 438 जारी हुआ था इसकी वैधता 11 मई 2017 तक थी इसके आधार पाए एजेंसी ने संस्कृति संचालनालय , मप्र , संस्कृति परिषद , रवींद्र भवन , पंजाबी साहित्य अकादमी , मप्र नाट्य विद्दालय आदि 14 सरकारी कार्यालयों में गार्ड तैनात किए 2012 से 2017 तक सब कुछ वैध रहा 2017 में दोबारा कान्टैक्ट निकले तो संचालक ने पसारा लाइसेंस का फर्जी नवीनीकरण कर फिर काम ले लिया और 2022 तक सेवाएं जारी रखीं |
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