भोपाल ( कशिश मालवीय ) राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की छात्रा रोशनी कलेश की मौत के मामले में अब नया मोड़ आ गया है मृतक छात्रा के पिता बंतार सिंह कलेश का दर्द अब क्रोध में बदल गया पिता ने पुलिस की सुसाइड थ्योरी को खारिज करते हुए कॉलेज प्रशासन और पीजी वार्डन पर गंभीर सवाल खड़े किए पिता का कहना है कि घटना रात 2 बजे की बताई जा रही है लेकिन उन्हें इसकी सूचना सुबह साढ़े 8 बजे दी गई रात में कॉल क्यो नहीं किया गया हमें तब पता चला जब खबर हर जगह चल रही थी परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है |
पिता का कहना है की रात में ही उनकी रोशनी से बात हुई थी वह पढ़ाई को लेकर चिंतित जरूर थी लेकिन कहती थी कि सिलेबस कवर कर लेगी नीट में 400 से अधिक अंक लाकर उसने खुद जीएमसी चुना था तनाव था पर वह इतनी कमजोर नहीं थी कि ख़ुदकुशी कर ले |
परिवार ने दावा किया कि शव देखने पर जहर या एसिड पीने जैसे स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आए न कपड़े पर कोई दाग थे और न उल्टी के निशान मौके से एसिड की बोतल भी नहीं बरामद हुई सीसीटीवी फुटेज की मांग पर सिर्फ एक छोटी क्लिप दिखाई गई जबकि बताया गया कि पूरी फुटेज पुलिस को दे दी गई है |
मामले में एनएमसी के मेंटर – मेंटी प्रोग्राम पर भी सवाल उठे हैं नियमों के अनुसार हर छात्र को एक मेंटर मिलना चाहिए लेकिन रोशनी का कोई मेंटर तय नहीं था सत्र 2025 शुरू हुए चार माह हो चुके हैं और अब तक एक भी बैठक नहीं हुई यह प्रोग्राम छात्रों को पढ़ाई तनाव और मानसिक सहयोग देने के लिए अनिवार्य है |
जीएमसी डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा – पिछले दो सालों में 40 छात्र डिप्रेशन में पाए गए जिन्हें समय रहते मदद दी गई रोशनी के मामले में कॉलेज को कोई सूचना नहीं मिली भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए हर माह संवाद कार्यक्रम लेट्स शेयर एंड केयर कक्ष और गोपनीय काउंसलिंग व्यवस्था शुरू की जा रही है हर सप्ताह अब एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें एचओडी सभी संवाद करेंगी |
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