भोपाल ( कशिश मालवीय ) मंगलवार को सांसद के गलियारों में उस वक्त हलचल पैदा हो गई जब विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए उन्हें पद से हटाने का नोटिस पेश किया जिस पर 114 सांसदों के हस्ताक्षर है विपक्ष का आरोप है कि बिरला ने सदन की कार्यवाही में खुले तौर पर पक्षपात किया और संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया संविधान के अनुच्छेद 94 ( सी ) के तहत दिए गए नोटिस पर कांग्रेस , सपा और डीएमके समेत कई दलों के करीब 120 सांसदों के हस्ताक्षर हैं हालांकि तृंणमूल कांग्रेस और नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का कहना है कि हम पहले एक अपील पत्र स्पीकर को देने के पक्ष में थे |
स्पीकर ने महासचिव उत्पल कुमार सिंह से कहा है कि वे नोटिस की जांच नियमों के अनुसार ही करें बिरला ने नैतिक आधार पर फैसला लिया है कि जब तक उनके खिलाफ लाया अविश्वास प्रस्ताव निपट नहीं जाता तब तक वे सदन की कार्यावही में हिस्सा नहीं लेंगे दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि अब राहुल गांधी और कांग्रेस को देश की राजनीति से हटाने का वक्त आ गया है |
प्रस्ताव में चार घटनाओं का हवाला दिया गया है पहला – राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया | दूसरा – आठ सांसदों का निलंबन | तीसरा – भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्रीयों पर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां ओर चौथा – स्पीकर ओम बिरला का पीएम की सुरक्षा को लेकर दिया गया बयान |
सबसे पहले नोटिस की भाषा और विशेष आरोपों की जांच सदन के उपाध्यक्ष करते हैं अभी लोकसभा में उपाध्यक्ष नहीं है इसलिए यह काम चेयरपर्सन पैनल के सबसे वरिष्ठ सदस्य करेंगे नोटिस देने के 14 बाद दिन बाद प्रस्ताव सदन में किया जाता है इस दौरान स्पीकर अध्यक्षता नहीं करते हैं उनकी जगह चेयरपर्सन पैनल के वरिष्ठ सदस्य ही फैसला लेते हैं सदन में नोटिस पेश होने के बाद यदि 50 सांसद इसका समर्थन करते हैं तो इस पर 10 दिन चर्चा हो सकती है चर्चा के बाद मतदान होता है अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं 13 खाली हैं , ऐसे में स्पीकर को हटाने के लिए 266 वोट जरूरी होंगे |
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