शिवपुरी / सड़क पर तेज रफ्तार का कहर तो अक्सर देखता है , लेकिन जब चार पहियों के नीचे इंसानियत कुचल दी जाए और फिर मदद के बजाय धमकियां मिलें तो समझ आता है कि घमंड कितना जानलेवा है ऐसा ही एक मामला शिवपुरी के पिछोर से गुरुवार को सामने आया है जहां विधायक के बेटे ने थार से 5 लोगों को रौंद दिया और बाद में मदद की बजाय पुलिस और पीड़ितों को अपनी रसूख की धमकियां दी | आरोपी शिवपुरी के पिछोर भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी का बेटा दिनेश लोधी है आरोपी घायलों को रौंद कर अस्पताल न ले जाकर कुछ मीटर दूर जिम जा पहुंचा और वहां कसरत करने लगा पुलिस जब घायलों के साथ जिम पहुंची तो विधायक पुत्र ने पछतावा न कर उल्टा घायलों और पुलिस पर हावी हो गया |
पीड़ितों के अनुसार – दिनेश लोधी ने पुलिस के सामने ही धमकाते हुए कहा कि बाप विधायक है , मर्डर भी निपटा लेगा , तुम घर जाओ | इसके बाद घायलों ने थाने में दिनेश लोधी के खिलाफ नामजद कार्रवाई करने के लिए आवेदन दिया थाने में जब दिनेश से पूछा गया कि गाड़ी में ब्रेक नहीं था क्या ? , तो विधायक पुत्र ने कहा – ब्रेक है सायरन दे रहा हूं, हॉर्न दे रहा हूं…तो लहरा काहे रहा था | तीन – तीन बैठे हैं बाइक पर और लहरा रहा था सड़क पर चल रहे लोगों को भी आरोपी ने धमकाया |
करैरा नगर में बेटे की करतूत का पता चलते ही पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी उन्होंने लिखा कि विधायक के लिए पुत्र – परिवार बड़ा नहीं होता , जनता सर्वोपरि है पुलिस प्रशासन से उम्मीद है कि करैरा के पीड़ितों को न्याय दिलवाएं |
भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने सोशल मीडिया पर परोक्ष रूप से स्वीकारा कि उनके बेटे ने ही हादसा किया विधायक पुत्र ने भी पुलिस के सामने कहा कि हॉर्न दे रहा था फिर भी बाइक लहरा रहा था पीड़ित की ओर से विधायक पुत्र के खिलाफ नामजद आवेदन और साक्ष्य देने के बावजूद करैरा पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज किया | बाद में जब पुलिस से लगातार सवाल पूछे जाने लगे तो एसडीओपी आयुष जाखड़ ने कहा कि पहले जो एफआईआर की गई थी कि उसमें टेक्निकल गलती हो गई थी मैं थाने पहुंचा और गलती का सुधार कराकर नामजद एफआईआर कराई है गाड़ी पर नंबर नहीं लिखा था साथ ही थार गाड़ी पर जो लिखा था उसका भी एफआईआर मे उल्लेख किया है |
अब यह देखना है कि पीड़ितों के न्याय के लिए पुलिस अपनी वर्दी का फर्ज निभाएगी या फिर सत्ता के ओर से दी गई धमकी से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ितों की उम्मीद पर पानी फैर मामला फाइलों में ही सीमित रह जाएगा ?
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