भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी) अक्सर समय समय पर जनता पुलिस संवाद के आयोजनो में ये सुनने को मिल जाता है कि पुलिस जनता की रक्षक है मित्र है मगर जमीनी हकीकत इससे बिलकुल उलट है पुलिस को जब भी मौका मिलता है वो वर्दी के भोकाल मे कोई अवसर नही छोडती जब आम जनता को उसकी बदतमीजी या कोप का शिकार नही बनना पड़ता हो
राजधानी मे 2 माह पूर्व पदस्थ हुए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार जिनकी छवि एक संवेदनशील आधिकारी की है वो खुद इन दिनो राजधानी के चप्पे चप्पे मे जाकर जनता से उनकी शिकायते और परेशानियों से रूबरू हो रहे है वहीं दूसरी और कई थानो के टीआई और उनका स्टाफ अपनी जनविरोधी मानसिकता के चलते पुलिस की छवि को वर्दी का रोब दिखाकर अपने ही विभाग के बड़े अफसरों के अच्छे कार्यो पर पानी फैरने का काम कर रहे है।
गौरतलब है कि भोपाल पुलिस कमिश्नर श्री संजय कुमार के निर्देशन में इन दिनो राजधानी में यातायात सुधार और दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेंट पहनने कि मुहिम को चलाया जा रहा है इसको लेकर राजधानी के विभिन्न थानो की पुलिस शाम होते ही विभिन्न छेत्रों में तैनात हो जाती है। जिसका समूचा ध्यान यातायात के सुचारु चलन पर कम बिना हेलमेंट के दो पहिया वाहन चालक पर चालानी कार्यवाही पर ज्यादा होता है। इसमे किसी को कोई आपत्ति नही कि बिना हेलमेंट पहन कर वाहन चलाने वालों पर चालानी कार्यवाही हो मगर इसमे मोटर व्हिकल एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का जिन थाने मे पदस्थ टीआई या एस आई स्तर के अधिकारियों को ज्ञान नही उनको तो कम से कम इस तरह की चेकिंग आभियान से दूर रखा जाना चाहिये राजधानी के गौतमनगर थाने के टीआई महेंद्र सिंह ठाकुर कुछ ऐसे ही कानून कायदों से अनभिक टीआई है, जिन्हें शायद बड़े पुलिस अफसरो की चापलूसी से या सत्ताधारी नेताओ कि क्र्पा से थाने की थानेदारी तो मिल गई है मगर कानून के हद मे रहकर पुलिस में कैसे काम किया जाता है इसकी पढ़ाई लिखाई पुलिस विभाग उनको सिखाना भूल गया है।
अब आते है चालानी कार्यवाही करने के पुलिस के अधिकार पर तो मोटर व्हिकल एक्ट के अनुसार और समय समय पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशो के मुताबिक कोई भी चालान कर्ता अधिकारी जो सड़क पर चेकिंग के लिये तैनात हें वो किसी भी वाहन चालक की गाड़ी से चाबी निकाल कर उसको रोकने का प्रयास नही करेगा और करेगा तो वो कानून के तय नियमो के खिलाफ कार्य करने का दोषी होगा ऐसी शिकायतों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तुरंत कार्यवाही कर इन जैसे वर्दी का भोकाल दिखाने वाले मैदानी पुलिस अफसरो पर कार्यवाही करनी चाहिए जो जनता के बीच खुद अपनी और पुलिस की छवि खराब कर रहे हें। गौरतलब है कि राजधानी के गौतम नगर टी आई इन दिनो शाम होते ही पूरे थाने की फोर्स के साथ डी आई जी चोराहे पर हेलमेंट चेकिंग के लिए खड़े होते है, जहां वो आते जाते वाहन चालको को रुकने का इशारा दिये बिना सीधे चाबी निकाल कर अपने स्टाफ कि और फेंक देते है इसी प्रकार कि एक घटना कल यानि 29 अप्रैल को रात 9 से 9;30 के बीच एक मीडिया कर्मी के साथ टीआई महेंद्र सिंह ठाकुर ने की जिसकी शिकायत 30 अप्रैल को मीडिया कर्मी ने पुलिस आयुक्त भोपाल से की है। जिस पर पुलिस आयुक्त ने जांच करवाने के बाद कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया है।
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