भोपाल ( नेहा शेख )मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना समेत अन्य सरकारी बीमा योजनाओ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। ठगो ने आम लोगो के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाकर 482 बीमा क्लेम के जरिये 9.60 करोड़ की रकम निकाल ली है। सीआईडी की जांच में अब तक दो मामले दर्ज किए गई है, जिसमें स्थानीय निकाय के कर्मचारियो, बैंक कर्मचारियो और बीमा कंपनियो की मिलीभगत की बात सामने आ रही है। सीआईडी के एसपी पंकज श्रीवास्तव का कहना है की पूरी सीडिंकेट की बारीकी से जांच की जा रही है। और अन्य आरोपियों को जल्द ही पकड़ा जायेगा।
फर्जीवाड़े का तरीका
एक ही नंबर से खुले दर्जनो खाते: ठगो ने ग्रामीणो को सरकारी योजनाओ का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाए। इन सभी खातो में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज कर नॉमिनी भी खुद को बना लिया।
किश्त भरी और डेथ सर्टिफिकेट बनवाया: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में सालाना 436 की प्रीमियम राशि भरने के बाद, ठगो ने सरपंच, सचिव, नगर निकाय और पंचायत के लोंगों से मिलकर जीवित लोगो के भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया।
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से बीमा क्लेम: मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर बीमा कंपनियो से फर्जी बीमा क्लेम पास कारवाए गए। फिर बीमा कंपनियो के अधिकृत बैंक खातों से राशि निकालकर इसे विभिन्न दस्तावेजो के आधार पर निकाल लिया गया।
एटीएम से नकदी निकासी: जैसे ही बीमा कंपनियो से रकम खातों में पहुंची, तो ठगो ने ग्वालियर और राजस्थान के एटीएम से नकदी निकाल ली।
बेंगलुरु, मुंबई और छत्तीसगढ़ तक पहुंचे तार
केस-1(इंदौर में एक्शन) सीआईडी ने आईसीआईसीआई बैंक की इंदौर शाखा से 59 खातो के रिकॉर्ड और केवाईसी दस्तावेज़ से जुड़े दस्तावेज़ जब्त किए है। पंजाब नेशनल बैंक(बेंगलुरु) से भी तीन पॉलिसीधारकों की जानकारी जुटाई गई है। केस 2(ग्वालियर और मुंबई का लिंक) ग्वालियर के खातों के दस्तावेजो के तहत सीआईडी ने भारतीय स्टेट बैंक की ग्वालियर शाखा से संदेहास्पद खाताधारको के मूल दस्तावेज जब्त किए है। एसबीआई की मुंबई स्थित अंधेरी ईस्ट कार्यालय से बीमा पॉलिसियों और क्लेम मंजूर करने से जुड़ा मूल रिकॉर्ड तलब किया गया है।
बैंको का आंतरिक ऑडिट सिस्टम भी नहीं पकड़ पाया; कई खाताधारियो के बैंक खातोऔर बीमा फार्म में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था, इसके बावजूद बैंक के सिस्टम में कोई आलर्ट दर्ज नहीं हुआ और न ही सेंदेहास्पद खातो की जांच की गई। कई बीमा पॉलिसीधारकों के नाम अलग-अलग थे, लेकिन नॉमिनी एक ही व्यक्ति को बनाया गया था। बैंक गडबड़ियों और बीमा कंपनियो ने क्लेम मंजूर करते समय इस गड़बड़ी को नजरआंदज कर दिया था।
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