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राजधानी के सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों कि जमीनी हकीकत अपने दावों से बिलकुल उलट है…


भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यपदेश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ नारी , सशक्त परिवार अभियान की शुरूआत 17 सितंबर से की थी | लेकिन राजधानी के सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों कि सच्चाई बिलकुल उलट है | केन्द्रों में न तो आंखों से जुड़ी समस्या देखी जा रही है न ही मानसिक और न ही कैंसर की स्क्रीनिंग की जा रही है | बता दें कि इस दौरान भोपाल में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस अभियान को न केवल महिलाओं बल्कि पुरुषों के लिए भी लाभकारी बताया था | इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ने की बात हुई थी | उनसे खुद जांच कराने और अधिक से अधिक लोगों को हेल्थ सेंटर पर लाने के कदम उठाने को कहा गया था | जबकि पांच दिन भी इस अभियान के प्रति अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता साफ दिख रही है | न प्रचार किया जा रहा है और न ही मॉनिटरिंग हो रही है | यही कारण है कि अभियान सिर्फ कागजों और बैनरों तक सीमित रह गया है | अभियान के दौरान 2115 महिलाओं को स्वास्थ्य परामर्श दिया गया , लेकिन यह सोचने वाली बात है कि बाकी कितनी महिलाएं अभी भी अनजाने में स्वास्थ्य जोखिम झेल रही हैं | एएनसी ( गर्भावस्था जांच ) केवल 1299 हुई , जबकि भोपाल के लाखों महिलाओं में गर्भवती महिलाएं कई गुना हैं |  ब्लड डोनर में सिर्फ 1903 महिलाओं ने भाग लिया , जो स्पष्ट रूप से बताता है कि जागरूकता की दूरी अभी भी लंबी है |

जानकारी के अनुसार अब तक 10 लाख से अधिक महिलाओं और किशोरियों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं | इसमें एएनसी जांच , टीकाकरण , कैंसर व डायबिटीज स्क्रीनिंग, सिकल सेल टेस्टिंग से लेकर दंत स्वास्थ्य रक्तदान और काउंसलिंग तक शामिल करने के दावे किए जा रहे हैं | पहले ही दिन भोपाल में 20  हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हुई थी , अब 46,731 महिलाओं तक स्क्रीनिंग का डेटा सामने आया है | इसमें 1,299 एएनसी जांचे और 12,448 महिला काउंसलिंग शामिल है |

अभियान के पांचवे दिन भी सरकारी सेंटर्स पर मेंटल हेल्थ पर फोकस किया जाना था | लेकिन पांचवे दिन स्वास्थ्य केन्द्रों पर कोई नहीं था |

भोपाल सीएमएचओ डॉ.मनीष शर्मा ने कहा – मुझे जानकारी मिली है | हमने पहले ही समझाइश दी थी कि कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए सभी अपने समय पर स्वास्थ्य केन्द्रों में मौजूद रहे | ऐसे में मौके से नदारद रहने के मामले की जांच कराई जाएगी , संबंधित डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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