Breaking News
Home / कारोबार / कफ सिरप से गई मासूम बच्चों की जान हुआ खुलासा , दवा लिखने पर मिल रहा था डॉक्टरों को कमीशन…..

कफ सिरप से गई मासूम बच्चों की जान हुआ खुलासा , दवा लिखने पर मिल रहा था डॉक्टरों को कमीशन…..


भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप मासूम बच्चों के लिए जानलेवा बन गया , वहीं डॉक्टरों को दवा लिखने पर कमीशन मिल रहा था | छिंदवाड़ा में 22 मासूमों कि जान लेने वाले सिरप के मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ , इन्हें दवा लिखने वाले आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी ने अपने मेमोरेंडम बयान में कोर्ट के सामने स्वीकार किया कि हर सिरप के लिए उन्हें श्रीसन फार्मास्युटिकल्स लिमिडेट से कंपनी से 10% कमीशन मिलता था | एक सिरप पर 89 रुपए एमआरपी दर्ज है , इतना ही नहीं , कई दवाइयां डॉक्टर की पत्नी और भतीजे की दुकान पर बेची जाती थीं , यानी कमीशन के बदले मासूमों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा था |

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशलय ने 18 दिसंबर 2023 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को फिक्स्ड- डोज कॉम्बिनेश्न दवाएं न दी जाएं | सरकारी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि डॉ. सोनी को यह जानकारी थी फिर भी उन्होंने यह दवा जारी रखी | जबकि डॉ. सोनी के वकील ने कहा कि डॉक्टर निर्दोष हैं , उन्हें तकनीकी आधार पर फंसाया गया है मिलावट की ज़िम्मेदारी निर्माता कंपनी की है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) ने भारत में कॉलल्ड्रिफ समेत निर्मित तीन कफ सिरप पर वैश्विक मेडिकल अलर्ट जारी किया है | इन दवाओं में डाइथलीन ग्लाइकॉल ( डीईजी ) पाया गया है बच्चों को देने पर किडनी फेल्योर , उल्टी , बेहोशी  बल्कि मौत तक हो सकती है | डब्ल्यूएचओ का यह अलर्ट सेंट्रल ड्रग्स स्ट्रैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ( सीडीएससीओ ) ने 8 अक्टूबर को बताया था कि तीन भारतीय दवाओं में डीईजी पाया गया , जो मानव शरीर के लिए अत्यंत जहरीला और हानिकारक है | जबकि भारत से इन दवाओं के नियार्त का कोई प्रमाण नहीं मिला है |

प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तमिलनाडु की डीएमके सरकार पर हमला बोला है | कार्ति ने बोला “ यह बेहद दुखद है कि 22 से अधिक बच्चों की मौत नकली खांसी की दवा से हुई | तमिलनाडु सरकार को बताना चाहिए कि इन बैचों को मंजूरी कैसे मिली |”

मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टर ही नही अधिकांश निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर भी कई दवाएं मिलने वाले मोटे कमीशन पर लिख रहे है इसके लिए कुछ दवा कंपनियो ने मेडिकल रिप्रेजेंटिव ( एम आर ) को इसके लिए अधिक्रत किया हुआ है जो इन निजी अस्पतालो के डोकटरों से संपर्क में रहते है।

About Saifuddin Saify

Check Also

चाइना मांझे की चपेट में आने से कॉलेज छात्र के गले 6 इंच लंबा कट , पुलिस की कार्यवाही के बावजूद बिक्री अब भी जारी…

🔊 पोस्ट को सुनें उज्जैन / मध्यप्रदेश उज्जैन के फ्रीगंज में जीरो पाइंट ब्रिज पर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Best WordPress Developer in Lucknow | Best Divorce Lawyer in Lucknow | Best Advocate for Divorce in Lucknow