भोपाल ( कशिश मालवीय ) राजधानी में इस वर्ष शुरुआती ठंड के चलते प्रदूषण और स्मॉग की परतें हवा को भारी बना रही हैं | इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है , शहर के हमीदिया , जेपी सिविल डिस्पेंसरी और निजी अस्पतालों के पल्मोनोलॉजी विभागों में अस्थमा व सांस की समस्या वाले मरीजों की संख्या दो सप्ताह में कई गुना तक बढ़ी है |
शहर के टीटी नगर , शाहपुरा पर्यावरण परिसर और कलेक्टोरेट परिसर प्रदूषण हॉट स्पॉट बन गए हैं , जहां एक्यूआई लगातार 300 के आसपास दर्ज किया जा रहा है | सोमवार को टीटी नगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स ( एक्यूआई ) 313 रिकॉर्ड किया गया यह विंटर अस्थमा वेव के तेज प्रभाव का संकेत है | डॉक्टरों का कहना है कि सुबह 4 से 8 बजे तक प्रदूषण ज्यादा खतरनाक रहता है इस समय मास्क पहनकर निकलें
अस्पतालों में अधिक संख्या में ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं , जिन्हें रात को सांस लेते समय सीटी की आवाज आती है , तेज सांस चलती या नींद में अचानक खांसी बढ़ जाती है | डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की श्वसन नलियां बेहद ही संवेदनशील होती हैं इसलिए ठंड व प्रदूषण मिलकर वायुमार्ग को जल्दी संकुचित कर देते हैं | यह सिर्फ सर्दी – जुकाम नहीं , बल्कि अस्थमा के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं यदि इसके इलाज में देरी की जाए तो यह जोखिम बढ़ सकता है |
जेपी , हमीदिया और एम्स के पल्मोनोलॉजी विभागों में हर दिन 40 से ज्यादा नए अस्थमा / सीओपीडी मरीज पहुंच रहे हैं | फेफड़ों की क्षमता व सांस नली रुकावट जांचने वाले पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट ( पीएफटी ) की मांग एक हफ्ते में अचानक बढ़ गई है |
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे एक्यूआई में सांस के मरीजों और बच्चों को बाहर लंबा समय नहीं बिताना चाहिए | भाग – दौड़ या भारी शारीरिक गतिविधि से बचना चाहिए , टैफिक व पब्लिक एरिया से बचे और मास्क के बिना बाहर न निकालें |
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