( सैफुद्दीन सैफी) मध्यप्रदेश को कभी शांति का टापू कहा जाता था , लेकिन अब यहां अराजकता का माहौल है भाजपा के राज में हर तरह के माफिया न केवल पनप रहे है , बल्कि परवान चढ़ रहे है | इनमें सबसे ज्यादा आतंक नदियों का सीना छलनी करने वाले रेत माफिया का है जो सारेआम नकारा व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, इसी माफिया की दबंगाई का नतीजा है कि मुरैना में चंबल नदी किनारे की रेत अब सिर्फ निर्माण का साधन नहीं रही बल्कि खून से सनी रक्तरंजित हकीकत बन चुकी है। अवैध रेत खनन रोकने निकले एक वनरक्षक को तेज रफ्तार ट्रैक्टर से कुचल दिया गया यह ट्रैक्टर भाजपा के दो नेताओं पवन तोमर और सोनू चौहान का है॰ बिना नंबर का यह ट्रैक्टर पिछले चार साल से नदी का सीना छलनी कर अवैध रेत का परिवहन कर रहा था | यह कोई हादसा नहीं , बल्कि सुनियोजित हत्या है | इस हादसे के जिम्मेदार केवल दो हाथ नहीं जो ट्रैक्टर चला रहे थे वे भी है जो व्यवस्था की कुर्सियों पर बैठे – बैठे इस खूनी खेल को फलने – फूलने दे रहे हैं | रेत माफिया का यह दुस्साहस रातों – रात नहीं पनपा , यह वर्षों के राजनीतिक संरक्षण प्रशासनिक ढिलाई और संस्थागत मिलीभगत का परिणाम है | दर्जनों थाना क्षेत्रों से अवैध तरीके से रेत लेकर वाहन गुजरते है , लेकिन कानून की आंखे बंद रहती है | सवाल यह भी है कि आखिर क्यों निहत्थे वन रक्षकों को इस खतरनाक मोर्चे पर झोंक दिया जाता है ? जिसके पास न पर्याप्त सुरक्षा न आधुनिक उपकरण और न ही तत्काल पुलिस सहायता की गारंटी | उन्हें रेत माफिया जैसे संगठित और हिंसक गिरोहों से भिड़ने के लिए भेजना क्या मौत के मुंह में धकेलना जैसा नहीं है | यह विडंमना ही है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत तक यह कह चुकी है॰ कि चंबल में नए डकैत रेत माफिया है तब भी राज्य की नीतियां और कार्यवाही उस गंभीरता को नहीं दर्शाती | ऐसे में सवाल उठता है क्या सरकार इस समांनातर सत्ता के आगे बेबस है ? रेत माफिया लाशों का सौदागर बन गया है | 2012 में बामौर के एसडीओपी आईपीएस नरेंद्र कुमार सिंह की खनन माफिया ने ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या की थी | 2015 में मुरैना पुलिस ने डंपर रोकने की कोशिश की थी तो ड्राइवर ने वाहन पीछे कर प्रधान आरक्षक धमेन्द्र चौहान को कुचल कर मार डाला था | 2018 में सराज छोला थाने में खड़े रेत से भरे वाहनों को छोड़ाने के लिए हमला किया | इसी तरह 2018 में ही अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह कुशवाह ने रोकने की कोशिश की एक ट्रॉली तो निकली लेकिन दूसरी ट्रॉली ने कुचल कर हत्या कर दी | 2021 में वन विभाग की एसडीओ श्रद्धा पांढ़रे पर हमला किया गया | हमलावर बंदूक , लाठी , फरसा लेकर आए फायरिंग की और रेत भरी ट्रैक्टर ट्रॉली छुड़ा ले गए | 2025 में संबलगढ़ में वन विभाग ने चंबल किनारे रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली जब्त की | माफिया के गुंडों ने वन अमले पर फायरिंग की पथराव किया | यह नदियां है खनन माफिया के आतंक की जो सरकार से पूछ रही हैं कि लाशों के बेलगाम सौदागरों पर लगाम कब कसी जाएगी ?
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