नई दिल्ली : 03/09/2024 : देशभर में विभिन्न मामलों के आरोपियों के घरों पर हो रहे बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि किसी के महज आरोपी होने पर उसका घर कैसे गिराया जा सकता है ? यहां तक कि अगर आरोपी को दोषी साबित कर भी दिया जाता है तो भी उसका घर नहीं गिराया जा सकता | हमारे पहले के रुख के बावजूद हमें सरकार के रवैये में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है, हम इस मुद्दे पर दिशा निर्देश जारी करेंगे | जिसका पालन सभी राज्यों को करना होगा | सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगा है इस पर अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी | जमीयत उलेमा-ए हिंद पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात व कुछ अन्य संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाने की मांग की है | सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र व यूपी सरकार की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में उन्होने कुछ समय पूर्व एक हलफनामा दायर किया था, उसके आधार पर इस विवाद को खत्म किया जा सकता है | यह हलफनामा 9 अगस्त 2022 को दायर किया था, इसमें कहा था कि किसी के अपराध में शामिल होने को उसका घर बुलडोजर से गिराने का आधार नहीं बनाया जा सकता | ऐसा सिर्फ नगर-निगम क़ानूनों के तहत ही किया जा सकता है | आरोपियों के घर गिराने की प्रथा 2017 में योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बनने के बाद यूपी में शुरू हुई थी, यह मॉडल 2018 में मप्र की कमलनाथ सरकार ने अपनाया | 2020 से 2022 के दौरान 12 हज़ार 640 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला | अप्रैल और जून 2022 के बीच मप्र में 56 घर ढहाए गए | सीएम डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि मैं बुलडोजर संस्कृति के पक्ष में नहीं हूं | इस नीति पर और विचार किए जाने की जरूरत है, पूर्व सीएम कमलनाथ ने मप्र में बुलडोजर संस्कृति शुरू की थी, लेकिन अब इसे खत्म करने की कवायद की जा रही है |
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