भोपाल : 23/12/2024 : नगर निगम में वाहनों से डीजल चोरी का खेल लगातार सामने आ रहा है | यहां निगम अफसर ही ड्राइवरों से डीजल चोरी करवाकर बिकवाते हैं और फिर उनसे वसूली करते हैं | लिंक रोड नंबर-3 स्थित डीजल शाखा की मशीनरी विंग में 50 गाड़ियां हैं, 50 ड्राइवर है इन्हें अफसर तय मात्रा से अधिक डीजल दिलवाते हैं फिर गुपचुप तरीके से इनसे डीजल निकालकर बिकवा देते हैं | हर ड्राइवर से हफ्ते में 1 हज़ार रु. वसूली होती हैं | यानी 50 हज़ार रु. हफ्ता वसूली डीजल चोरी सहित महीने में पूरा खेल 30 लाख रु. का है | निगम अफसरों की इस वसूली गैंग ने ड्राइवरों से डीजल चोरी के बाद उसे इकट्ठा करने के लिए टीम भी लगा रखी है | यह तय पॉइंट पर केन में डीजल लेकर उसे बेचती है | निगम की परिवहन शाखा से सभी ज़ोनों में अलग-अलग काम के लिए सरकारी वाहनों के अलावा प्राइवेट वाहन भी भेजे जाते हैं | इनसे भी उगाही होती है | 50 वाहनों को रोज औसतन 2 हज़ार लीटर डीजल मिलता है, इसमें से 50% डीजल चोरी होता है | यानी रोजाना 91 हज़ार का डीजल बिक जाता है | हफ्ते की वसूली अक्सर शनिवार को अंधेरे कमरे में होती है | बाहर सबके सामने ड्राइवर को माचिस या सिगरेट का पैकेट देने को कहा जाता है माचिस यानी 500 रु. सिगरेट यानी 1 हज़ार रु. | परिवहन शाखा में बतौर क्लर्क काम करने वाला सुनील नामदेव मशीनरी विंग के मुखिया हामिद खान का करीबी है | अंधेरे कमरे में ड्राइवर इसे ही पैसे देते हैं | पहले खुद हामिद ड्राइवरों से पैसे लेता था | परिवहन शाखा विभाग के प्रभारी चंचलेश गिरहारे के पास सीएनजी स्टेशन डीजल खपत की जांच का जिम्मा है | यह भी मानते हैं कि वसूली का खेल 2-3 साल से चल रहा है, उनका कहना है कि ड्राइवरों से बंद कमरों में वसूली के वीडियो पहले भी सामने आए थे, ये दो यूनियन के आपस का मामला है | इस मामले के उजागर होते ही जांच तेज़ कर दी गई है ड्राइवरों से डीजल चोरी करवाकर वसूली करने वालों के खिलाफ जल्द कार्यवाही की जाएगी |
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