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फर्जी यूनिटों के नाम पर करोड़ों रुपए के लोन और लाखों की सब्सिडी केवल 3 माह में ही ली…..


भिंड,मध्यप्रदेश में उद्दानिकी विभाग के अधिकारियों ने निजी कंपनियों से मिलीभगत कर शासन से किसानों को मिलने वाली सब्सिडी से अपनी जेब गरम कर ली  प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज ( पीएमएफएमई ) योजना को लेकर घोटाले  का मामला सामने आया | ग्वालियर , भिंड और मुरैना में खेतों में केवल टीनशेड लगाकर फर्जी यूनिटें बनाई गई हैं | इन फर्जी यूनिटों के नाम पर करोड़ों रुपए के लोन और लाखों की सब्सिडी केवल 3 माह में ही ले ली गई |

पड़ताल में खुलासा हुआ कि प्रदेशभर में 7, 985 लाभार्थियों को 1.03 लाख करोड़ रु. का लोन व 272 करोड़ की सब्सिडी दी गई , जिनमें से कई यूनिटें फर्जी हैं | माइक्रो फूड यूनिट के लिए कपड़ा और किराना दुकानों के फर्जी कोटेशन प्रस्तुत किए गए | उद्दानिकी विभाग ने बिना जांच इन्हें मंजूरी दी , जबकि बैंकों ने दलालों के जरिए लोन और सब्सिडी पास कर दी | ग्वालियर में उद्दानिकी के असिस्टेंट डायरेक्टर एमपीएस बुंदेला , ने बताया कि आंतरिक जांच करवाई गई है , कुछ गड़बड़ियां मिली हैं |

उद्दानिकी विभाग में पीएमएफएमई के लिए डीआरपी ( डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन ) बनाए गए हैं , जो हितग्राही से डॉक्यूमेंटेशन कराने के साथ – साथ प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बनाकर देते हैं | इसके बाद विभाग जांच कर संबंधित फाइल को बैंक में लोन के लिए बढ़ाता है |

उद्दानिकी विभाग से प्रकरण मिलने के बाद बैंक की एप्रूवल कमेटी ( बैंक का आरएएसी डिपार्टमेंट ) लोन पर निर्णय लेती है | लोन मंजूर करने से लेकर राशि जारी करने तक संबंधित बैंक की दूसरी शाखा या बैंक के रीजनल ऑफिस से दल जाकर जांच करता है |

पिछोर में क्रषि मंडी के सामने खेत में फर्जी यूनिटें दिखाई गईं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया , तुरारी शाखा ने अगस्त – सितंबर 2024 के बीच हर यूनिट को करीब 24.30 लाख का लोन व तीन माह में 10 – 10 लाख की सब्सिडी दी | बैंकों की रीजनल मैनेजर प्रियंका बंसल ने इसे इंटरनल मैटर बताया | एलडीएम अमिता शर्मा ने जांच की बात कही है |

भिंड में जयपाल सिंह को ऑयल मिल के लिए 1.15 करोड़ का लोन , 10 लाख की सब्सिडी मिली , जांच में यूनिट नहीं मिली, मोबाइल नंबर भी गलत था इसी भूखंड पर कई लोन पास हुए थे |

5 साल में लाभार्थियों की संख्या 62 से बढ़कर 3,150 हो गई , इस तेजी से बढ़ती संख्या के साथ फर्जी यूनिटों और सब्सिडी / लोन घोटलों के जोखिम भी बढ़ गए हैं |

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