भोपाल, 12 मई 2026
हाल ही में भोपाल में एक गंभीर घटना सामने आई , जिसमें एक मुस्लिम युवक पर झूठा “लव जिहाद” का आरोप लगाकर कुछ सांप्रदायिक तत्वों द्वारा पुलिस की मौजूदगी में उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, उसका मुंह काला किया गया तथा उसे अपमानित करने का प्रयास किया गया।
इस दौरान वहां मौजूद कुछ शरारती तत्वों द्वारा इस्लाम और अल्लाह तआला के बारे में भी आपत्तिजनक एवं अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया।
इस गंभीर मामले पर अपना बयान जारी करते हुए जमीयत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि यह अत्यंत, शर्मनाक और अमानवीय घटना है।
किसी भी नौजवान पर झूठा “लव जिहाद” का आरोप लगाकर हिंसा करना कानून को खुलेआम अपने हाथ में लेने जैसा है और यह शहर के अमन-चैन के लिए भी खतरा है।
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार उक्त युवक का उस युवती के साथ कई वर्षों से संबंध था, लेकिन इसके बावजूद उस पर झूठा आरोप लगाकर इस प्रकार की हिंसा करना पूरी तरह अमानवीय कृत्य है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में “लव जिहाद” जैसी किसी अवधारणा का कोई अस्तित्व नहीं है, और न ही इस्लाम किसी पुरुष और महिला को विवाह से पूर्व अवैध संबंध या “लिव-इन रिलेशनशिप” की अनुमति देता है। इसलिए “लव जिहाद” के नाम पर नफरत फैलाना और हिंसा करना केवल सांप्रदायिक तत्वों का झूठा प्रोपेगेंडा है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी मामले में किसी व्यक्ति या समूह को यह अधिकार नहीं है कि वह स्वयं कानून हाथ में लेकर सड़कों पर फैसला करता फिरे। इस प्रकार की घटनाओं से पूरे विश्व में भारत की छवि खराब हो रही है और यह संदेश जा रहा है कि देश में संविधान और कानून का शासन नहीं बल्कि कुछ सांप्रदायिक तत्वों ने कानून को अपने हाथ में ले रखा हैं।
हाजी मोहम्मद हारून ने भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा इस घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाए। जिन लोगों ने युवक के साथ मारपीट की तथा इस्लाम और अल्लाह तआला की शान में आपत्तिजनक बातें कीं, उनके खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तत्वों को कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे देश में अराजकता बढ़ेगी और न्याय की सर्वोच्चता कमजोर होगी।
उन्होंने कहा कि देश में अमन, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक पीड़ित को न्याय मिले। यदि न्याय नहीं होगा तो समाज में शांति कायम नहीं रह सकती।
अंत में हाजी मोहम्मद हारून ने मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग कि है कि पीड़ित युवक को उचित मुआवजा दिया जाए, और उसका समुचित उपचार कराया जाए तथा सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।