भोपाल( नेहा शेख ) विपिन पटेल ने सितंबर महीने में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट बुक किया था। उन्हें भरोसा दिया गया था की मकान कि चाबी जल्द ही मिल जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज तक सिर्फ दो बार पेंट करने और दरवाजे लगाने की बात ही कही जा रही है, काम अब भी अधूरा पड़ा है। विपिन की तरह ही ज़्यादातर लोग सीएम हाउस के चक्कर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योगना के 21 निर्माण कार्यो की कुल लागत 1469.40 करोड़ रुपये है। योजना के 21 प्रोजेक्ट्स मे 11,289 मकान बनने है। इनमे से 15 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जिनके लाभार्थियो को 24 महीने के अंडर मकान मिलने थे, लेकिन अब 5 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है और लोग लगातार इंतजार करने को मजबूर है। इसके बावजूद हितग्राही 4000 हर महीने का किराया दे रहे हैं।
एक प्रभारी एई पर 9 प्रोजेक्ट्स का जिम्मा
प्रभारी सहायक यंत्री सुभम वर्मा अकेले ही 9 बड़े प्रोजेक्ट्स का काम संभाल रहे हैं। इनमे 174.46 करोड़ की लागत वाला प्रोजेक्ट्स सबसे बड़ा है। इसके अलावा कलखेड़ा, बाजपेयी नगर, नीलबड़, बैरागढ, आलम नगर, रासलाखेड़ी, भानपुर और मालिखेड़ी की ज़िम्मेदारी भी इन्ही के कंधो पर है। वहीं दीपक सरोडा के पास बागमुगलिया, हिनोतिया आलम पार्ट-2 और समरधा के तीन प्रोजेक्ट्स के प्रभार है। दूसरी तरफ, नितेस श्रीवास्तव 146.76 करोड़ रुपये के 12 नंबर बस स्टॉफ प्रोजेक्ट के अलावा राहुल नगर हाईराइज, गंगा नगर/श्याम नगर और कोकता के प्रोजेक्ट्स का काम देख रहे है।
21 प्रोजेक्ट्स के लिए कम से कम 8 एई जरूरत: इंजीनियर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की 15-16 बड़े प्रोजेक्ट्स की उचित माँनिटरिंग और निगरानी के लिए कम से कम 8 सहायक यंत्री और 8 सब-इंजीनियर होने जरूरी हैं। लेकिन इसके विपरीत, एक-एक अधिकारी को कई-कई साइटो का प्रभार सौंप दिया गया है। इसका सीधा असर सीमेंट-सरिया की क्वालिटी, निर्माण कार्यो की गति और ड्राइंग-डिजाइन की जांच पर पड रहा है।
81 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियो के भरोसे पूरा तंत्र: पूरा सिस्टम इस समय 81 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के सहारे टीके रहने को मजबूर है। वाजपेयी नगर साइट पर प्रवीण बंसल, आशीष मालवीय, नदीम खान और विशाल श्रीवास्तव जैसे चार कर्मी तैनात है। इसके अतिरिक्त 12 नंबर बस स्टॉफ, कोकता और बागमुगालिया की फील्ड ड्यूटी भी इन्ही कर्मचारियो के भरोसे छोडी गई है। जनसेवा केंद्र, आवक-जावक, फाइल संधारण, सीएम हेल्पलाइन और कलेक्ट्रेट में पंजीयन व मुद्रांक शुल्क छूट से जुडे सभी काम भी यही संभाल रहे है। हालांकि, किसी भी प्रकार की तकनीकी जांच या निर्माण की गुणवत्ता को इन कर्मचारियो के भरोसे तय नहीं किया जा सकता है।
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