भोपाल ( कशिश मालवीय ) खसरे का दायरा उम्मीद से कई ज्यादा बढ़ चुका है प्रदेश में खसरा संक्रामण के नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल पैदा कर दी है ये मामलों ने एक नए खतरे की तरफ इशारा किया है हैरान करने वाली बात यह है कि इस संक्रामण की चपेट में 9 माह के मासूम बच्चे से लेकर 40 वर्षीय तक के लोग भी शामिल हैं |
अलीराजपुर , दतिया , शिवपुरी और बुरहानपुर जिलों में स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम ने बुखार , दाने और खांसी वाले मरीजों की जांच सैंपलों की जांच में 12 नए खसरे के केस की की पुष्टि हुई हैं आंकड़ों ने हर किसी को हिला कर रख दिया है 2026 में मिले नए केस के बाद प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है स्वास्थ्य विभाग ने घर – घर सर्वे शुरू कर दिया है | मरीजों को लक्षणों के अनुसार उपचार और विटामिन – ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है ग्रामीणों , आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं , शिक्षकों व विद्दार्थियों को संक्रामण से बचाव , मरीजों को अलग रखने , साफ – सफाई और पोषण पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है नेशनल हेल्थ मिशन ने टीम भेज दी है भोपाल स्थित स्वास्थ्य संचालनालय ने भी अलर्ट जारी कर दिया है |
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुमित रावत ने बताया कि खसरे के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण समय पर टीकाकरण न होना है विशेष रूप से विमुक्त और घुमक्कड़ समुदाय के लोग लगातार पलायन करते हैं , जिससे उनका समय पर टीकाकरण नहीं हो पता कोरोना महामारी के दौरान भी बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुए थे जिससे कई बच्चे टीके की डोज़ से वंचित रह गए थे |
खसरे का वायरस नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और श्वसन तंत्र के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है खांसने या छींकने पर यह हवा में फैलकर दूसरों को संक्रमित कर सकता है विशेषज्ञों के अनुसार मीजल्स – रूबेला वैक्सीन समय पर दोनों डोज लगवाने से गंभीर संक्रामण और मौत का खतरा काफी कम हो जाता है |
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