भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी) राजधानी भोपाल को जहां ताल तालाबो, शैल-शिखरो ,
शेर –ओ सुख़न के शहर के तौर पर जाना जाता है, तो वही इसकी पहचान गंगा जमनी तहजीब वाले शहर के रूप में भी है। यहाँ की अमन पसंद आवाम ने कभी भी एक दूसरे को मज़हबी चशमे से नहीं देखा। सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते आए है,भोपाली पटियो पर राम, मोहम्मद,करतार, डिसूजा, एक साथ बैठकर सियासत का पोस्टमार्डम करते रहे है। लेकिन पिछले कुछ सालो से इस शहर को बदनज़र लग गई है। मशहूर शायर अदम गोंडवी ने क्या खूब कहा है, “हिन्दू मुस्लिम के जज़्बात को मत छेड़िए, जो बात दफन हो गई उस बात को मत छेड़िए मगर इस जज़्बात को न सिर्फ छेड़ा जा रहा है बल्कि माहौल को ऐसा ज़हरीला बना दिया गया है कि आज शहर का हर अमन पसंद शहरी खौफजदा है।
इसकी सबसे बड़ी वजह है ऐसे नेताओ तथा संगठनो का वजूद मे आना जिन्होने
तथाकथित तौर पर धर्म मजहब का ठेका ले रखा है। राजधानी मे दो ऐसे सियासतदां है जिन्होने अघोषित रूप से खुद को हिन्दू ह्रदय सम्राट कहलाना शुरू करा दिया है। और इन्ही कि सरपरस्ती मे ऐसे कथित संगठन सक्रिय हो गए है,
जिंनका एक ही काम है कि शहर कि होटलो पर छापा मारो और ऐसे जोड़ों कि तलाश करो जिसमे एक हिन्दू हो दूसरा मुस्लिम हो फिर उन्हे सारे आम बेइज़्ज़त करते हुए मारपीठ कर अपनी गुंडई का दबदबा कायम करो।
सवाल यह है कि धर्म के इन तथाकथित ठेकेदारो को यह सूचना कौन देता है कि फला होटल मे संधिग्ध जोड़ा ठहरा हुआ है? लिव इन रिलेशन शिप को कानूनी मान्यता है धर्म और मजहब से ऊपर उठकर कोई भी किसी के साथ रह सकता है लेकिन लगता है कि धर्म के ठेकेदारो को इससे कोई मतलब नहीं उन्हे तो बस अपनी भड़ास निकालने का बहाना चाहिए जहां तक सवाल पुलिस प्रशासन का है तो उसकी कार्यवाही भी धार्मिक संकीर्णता का ही परिचय देती है जिम्मेदारों के पास इस सवाल का कोई जवाब है कि धर्म और संसक्राति के जिन अलमबरदारों ने सारे आम गुंडागर्दी कर माहौल बिगाड़ने कि कोशिश की क्या उनके खिलाफ कोई कारगर कार्यवाही होगी उनकी इस जुर्रत के लिए, होटलों मे घुस कर कमरो की तलाशी लेने का अधिकार उनको किसने दिया इन अराजकता फैलाने वाले गुंडों का आका कौन है? किसकी सरपरस्ती मे ये संगठन बेलगाम हो रहे है। लाज गेस्टहाउस और होटल संचालको को पुलिस प्रशासन यह निर्देश क्यों नही देता की यदि ऐसे तत्व जबरन घुसते है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए सड़कों पर चालानी कार्यवाही करने वाली पुलिस इन गुंडो के खिलाफ कार्यवाही करने मे मुस्तैदी कब दिखाएगी धर्म मजहब की ठेकेदारी लेकर बैठे इंसानियत के दुश्मनों की खुले आम गुंडागर्दी पर उतारू होना यही दर्शाता है कि कहीं न कहीं उनपर कानून के मुहाफ़िजों का वरदहस्त है।
ऐसे मामले लगातार सुर्खिया बनने के बावजूद प्रदेश के मुखिया का इसपर कोई बयान या सख्त कार्यवाही का संदेश न देना, गुंडागर्दी और कानून अपने हाथ मे लेने वालों के होसले बुलंद करता है। जागो जागो मोहन सरकार
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