भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश राजधानी के जेपी अस्पताल साल के शुरुआती 9 दिन में ही अस्पताल की फार्मेसी से मरीजों को मिलने वाली दवाओं में खामियों के दो मामले सामने आए हैं अस्पताल में मरीजों को इलाज के नाम पर ऐसी दवाएं दी गईं , जो राहत तो नहीं बल्कि खुद बीमारी फैलाने का कारण बन सकती थी |
3 जनवरी का पहला मामला है सतीष सेन नामक युवक ने दर्द में दी जाने वाली डिक्लोफेनाक 50 एमजी टैबलेट में फफूंदी होने की शिकायत की , दूसरा मामला 6 जनवरी को सामने आया जब मनीष नामक मरीज ने क्लोरहेक्सिडिन माउथवॉश की सील पैक बोतल में कीड़े जैसी आकृति होने का दावा किया दोनों शिकायतों की तस्वीरें भी शिकायत के साथ अटैच की गईं जिसने अफरा – तफरी मचा दी मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने 5 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया फूड एंड ड्रग प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की यह टीम अस्पताल की फार्मेसी , ड्रग स्टोर और यहां तक कि भोजन सामग्री तक की गुणवत्ता जांच रही है सीएमएचओ का कहना है कि फफूंदी लगी दवा का स्टॉक दिसंबर में ही खत्म हो चुका था जबकि माउथवॉश में दिख रही अजीब आकृति की हकीकत जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी |
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