भोपाल ( नेहा शेख ) मालिखेड़ी त्रासदी: कर्ज के दलदल में फंसे नरेंद्र का दर्द बहन ने बयां किया-घर चलाने से लेकर मकान का किराया चुकाने तक माँ करती थी मेहनत, चार दिन पहले लेनदार घर पर धमकी देके गया था
आर्थिक तंगी और कर्ज का बोझ: एक साल पहले तक नरेंद्र और उसके परिवार की माली हालत ठीक थी, लेकिन कारों के व्यापार में लगातार नुकसान होने के कारण उन पर भारी वित्तीय संकट आ गया। हालत इतने बिगड़ चुके थे। कि कर्ज चुकाने के लिए उन्हें अपना मकान, कार और बाइक तक बेचनी पड़ गई, इसके बावजूद देनदारी खत्म नहीं हुई, तनाव के चलते नरेंद्र पिछले 15 दिनों से काम पर भी नहीं जा पा रहा था।
पारिवारिक संघर्ष: घर का खर्च चलाने और नरेंद्र का दर्द साझा करते हुए परिजनों ने बताया कि वह भाई को पैसे तक नहीं दे पाता था। ऐसे में घर कि ज़िम्मेदारी उठाने के लिए माँ खुद काम करती थी और लोगों के घरों में काम करके मकान का किराया चुकाती थीं। परिजनों के अनुसार, घटना से महज चार दिन पहले एक लेनदार घर पर बकाया रकम मांगने आया था। लगातार बढ़ती बेचैनी और कर्जदारों के दबाव के कारण परिवार अंदर से टूट चुका था।
देनदारी का ब्योरा: बहन मधु के मुताबिक, नरेंद्र ने पार्टनरशिप में रेस्टोरेंट भी चलाया था, जिसमे घाटा हुआ। वहीं जीजा दीपक सिंह का कहना है कि नरेंद्र पर करीब 25 से 30 लाख रुपए का कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए उसने मकान व बाइक बेची थी। और गहने भी गिरवी रखे थे। अक्टूबर 2025 से परिवार मालिखेड़ी मे रहने आया था, जहां पुलिस के अनुसार कर्ज कि पुष्टि नहीं हुई है।
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