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जहरीली मूंग खरीद का मामला मप्र मे कोटा से ज्यादा खरीदी गई मूंग ,30% कम दाम पर बेची सालाना 1000 करोड़ का घाटा


भोपाल ( नेहा शेख )खतरनाक कीटनाशक और मूंग खरीद का मामला:जिस मूंग की फसल के लिए हानिकारक और अनुपयोगी बता चुके थे, उसी की सरकारी खरीद मे राज्य को हर साल लगभग 1000 करोड़ का भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि सरकार ने इस मूंग को कभी किसी प्रयोगशाला (लैब) में जांच ही नही कारवाई। हालांकि, सरकार लगातार यह दावा करती रही कि इसकी खेती में अनुपात  से ज्यादा खतरनाक कीटनाशको का प्रयोग हो रहा है। जिन रसायनो को स्वास्थय के लिए जहरीला बताया गया, उन पर भी लंबे समय तक कोई बैन नहीं लगाया गया।

नर्मदापुरम और भोपाल संभाग के किसानो को गर्मी के मौसम में कम समय में मूंग की फसल  लेने के लिए पैराक्वाइट डाइक्लोराइड और ग्लोइफोसेट जैसे टॉक्सिक केमिकल्स  का प्रयोग करते है। पैराक्वाइट एक बेहद जहरीला और तेजी से असर करने वाला खरपतवार नाशक है, पौधों की पत्तियां सूखा देता है। मानव शरीर के संपर्क में आने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसी वजह से दुनिया के कई देशो में इस पर रोक लगी हुई है।

केंद्र और राज्य सरकार का बैन: इस रसायन के अत्यधिक जहरीलेपन को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले महीने इसके नए रजिस्ट्रेशन और प्रयोग पर पूरी तरह बैन लगा दिया था।  इसके बाद, मध्यप्रदेश सरकार ने भी 14 अक्टूबर को इसे राज्य में प्रतिबंधित (बैन) कर दिया। ग्लायफोसेट का प्रयोग भी इसी तरह की खेती में किया जा रहा है।

आंकडे और बयान

खरीद और खाते का आंकड़ा

कोटा से ज्यादा खरीदी, फिर भी 30% कम दाम पर बेचना पड़ा

वर्ष      केंद्र से मिला कोटा(लाख टन)  मप्र ने कोटा से अधिक खरीदा

2023-24      2.76                 2.84

2024-25      3.31                 2.49 

2025-26      4.20                 3.52

2026-27      5.39                 0.62

आंकड़े लाख टन में है

घाटे की फसल:

साल 2023-24 से 2025-26 के बीच राज्य सरकार की और से खरीदी गई मूंग पर कुल 9070 करोड़ की लागत आई।

मप्र ने पिछले चार साल में मिले कोटे से दो गुना तक अधिक खरीदी की।

कोटे से ज्यादा खरीदी गई मूंग को खुले बाजार मे 20% से 30% कम दाम  पर बेचना पड़ा।

इस वजह से राज्य सरकार को कुल 3062 करोड़(यानी तकरीबन 1000 करोड़ प्रति वर्ष)का घाटा हुआ।

साल 2026-27 में यह घाटा कम होने की उम्मीद है क्योकि केन्द्रीय कोटे के अंदर ही खरीदी हुई है।

रकबा और उत्पादन

पिछले 5 सालो में(2021-22 से 2026 तक) ग्रीष्मकालीन (गर्मी की) मूंग का रकबा 3 गुना तक बढ गया है।

फसल उत्पादन 3-4 लाख टन से बढ़कर अब लगभग 9 लाख टन हो गया है

 “गर्मी की मूंग में हानिकारक कीटनाशको का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर जल्दी ही कड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। मूंग की जांच को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगा।

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